बुलडोजर -हूबनाथ

(बीते दिनों कानुपर देहात में योगी सरकार का बुलडोजर एक बार फिर गरजा। इस बार कब्जा हटाने के नाम पर निर्दोष मां-बेटी को लील गया। योगी का बुलडोजर न्याय ऐसा ही है।- सम्पादक)

सिर्फ़

एक शब्द ही नहीं

एक मशीन ही नहीं

एक अवधारणा भी नहीं

बल्कि

एक पालिसी है

एक नीति

एक कूटनीति है

बुलडोजर

संविधान की पुस्तक में

छिपा एक दीमक है

सत्ता की आत्मा में पैठा

एक डर है

शक्तिहीनता का संबल

पौरुषहीनता की दवाई है

बुलडोजर

झूठ का पहाड़

जब ढहने लगे

क्रूरता के किले की दीवार

में सेंध लग जाए

रंगे सियार का

उतरने लगे रंग

तो सबसे बड़ा सहारा है

बुलडोज़र

खेतों को रौंदता हुआ

कमजोर घरों को ढहाता

झोंपड़ियां उजाड़ता

नंगी भूखी भीड़ पर

रौब जमाता

जब थक जाता है

तब सत्ता की जांघ तले

सुस्ताता है

बुलडोजर ।

साभार : https://samalochan.com/

आलेख

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?

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अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं। 

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