दिल्ली : फ़ूड प्रोसेसिंग फैक्टरी में आग, 3 मज़दूरों की मौत, 6 मज़दूर घायल

8 जून शनिवार को सुबह 3:30 बजे दिल्ली के नरेला इलाके में फ़ूड प्रोसेसिंग कम्पनी श्याम कृपा फ़ूड्स प्राइवेट लिमिटेड में आग लगने से तीन मज़दूरों की मौत हो गयी और 6 मज़दूर घायल हो गये। इस फैक्टरी को दाल मिल के नाम से भी लोग जानते हैं। यहाँ सूखी मूंग बनायीं जाती थी।

आग उस समय लगी जब कच्ची मूंग की प्रोसेसिंग के दौरान गैस लीक हुई और पाइप से होते हुए कम्प्रेसर तक आग पहुंच गयी। कम्प्रेसर के गर्म हो जाने से उसमें विस्फोट हो गया और आग ग्राउंड फ्लोर से तीसरी मंजिल तक पहुंच गयी। और मज़दूरों को अपनी चपेट में ले लिया।

दिल्ली में फैक्ट्रीयों में आये दिन कहीं न कहीं आग लगने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। नरेला में ही कई बार आग लगने और फैक्ट्रीयों में विस्फोट की घटनाएं सामने आयी हैं। लेकिन उसके बाद भी न श्रम विभाग और न ही सरकार इस ओर ध्यान दे रही है। और यह अकारण नहीं है। दरअसल मज़दूरों की जिंदगी का कोई मोल इनकी नज़रों में है ही नहीं।

आलेख

/sadho-thagawa-nagariya-lootal-ho

वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?

/west-asia-ke-sankat-ka-vaishawik-prabhaav

अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं। 

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।