आगे बढ़ता मजदूर आंदोलन और हाथ मलता सुधारवादी नेतृत्व
देश के बड़े हिस्से में मजदूर संघर्षों की लहर जारी है। उदारीकरण-निजीकरण-वैश्वीकरण के दौर में ज्यादा तेजी बढ़ती हुई पूंजीपति वर्ग और मजदूर वर्ग की खाई की पृष्ठभूमि में मजदूरी
देश के बड़े हिस्से में मजदूर संघर्षों की लहर जारी है। उदारीकरण-निजीकरण-वैश्वीकरण के दौर में ज्यादा तेजी बढ़ती हुई पूंजीपति वर्ग और मजदूर वर्ग की खाई की पृष्ठभूमि में मजदूरी
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार नोएडा में हुए मजदूर आंदोलनों से इतना घबरा गयी है कि वह अब मई दिवस की महान परंपरा को भी नहीं मनाने दे रही है। मई दिवस के शहीदों को याद करने से भ
फरीदाबाद/ दिनांक 14 मई 2026 को फरीदाबाद जन संघर्ष समिति के बैनर तले इंकलाबी मजदूर केंद्र एवं अन्य घटक संगठनों ने एक प्रदर्शन आयोजित किया। यह प्रदर्शन हरि
भारत का मजदूर वर्ग उदारीकरण- निजीकरण की नीतियों के भारत में लागू होने के बाद की सबसे तीव्र लहरों में से एक (और संभवतः सबसे व्यापक) से गुजर रहा है। यद्यपि यह लहर अप्रैल मा
उत्तर भारत में दो माह पूर्व पैदा हुई मजदूर संघर्षों की लहर लगातार जारी है। मजदूरों के संघर्ष की इस लहर ने पहले हरियाणा-उ.प्र.
मौजूदा मजदूर आंदोलन के उभार को पूरे देश ने देखा। कैसे मजदूर अपनी बदहाल होती स्थिति को लेकर सड़कों पर उतर आए और एक के बाद एक कई फैक्टरियों में मजदूरों ने काम बंद कर हड़ताल क
अप्रैल माह की शुरूआत से मानेसर-नोएडा-फरीदाबाद-भिवानी में एक के बाद एक फैक्टरी में मजदूरों का आक्रोश दावानल बनकर फूट पड़ा। सालों से अपने मालिकों-प्रबंधन के शोषण-उत्पीड़न को
मैं पिछले 3 दिन में 2 बार गिरफ्तार हुआ। 13 मार्च को हम बवाना औद्योगिक क्षेत्र के बंगाली चौक पर मजदूरों से गैस की समस्या को लेकर बात कर रहे थे और उनको गैस की समस्या के लिए आंदोलन के लिए सूचित कर रहे
बदायूं/ उत्तर प्रदेश की बदायूं तहसील के परिषदीय स्कूलों में मिड डे मील बनाने का ठेका एन जी ओ को दिए जाने के विरोध में और अन्य मांगों को लेकर प्रगतिशील रस
अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः
एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।
इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।
गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।
अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।