नस्लीय इजरायल को एज्योर नहीं

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माइक्रोसाफ्ट ने चार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है, जिन्होंने कंपनी के इजरायल के साथ संबंधों को लेकर कंपनी परिसर में विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था, जिनमें से दो ऐसे थे जिन्होंने इस सप्ताह कंपनी के अध्यक्ष के कार्यालय पर धरने में भाग लिया था।
    
अन्ना हैटल, रिकी फेमेली, निसरीन जरादत और जूलियस शान को नौकरी से निकाल दिया गया है। माइक्रोसाफ्ट ने कहा कि कंपनी की नीतियों के गंभीर उल्लंघन के बाद कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया। गुरुवार को जारी अपने बयान में, कंपनी ने कहा कि हाल ही में साइट पर हुए प्रदर्शनों ने ‘‘सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएं पैदा की हैं’’।
    
नो एज्योर फार अपार्थाइड, जिसका नाम माइक्रोसाफ्ट के एज्योर साफ्टवेयर पर आधारित है, ने मांग की है कि कंपनी इजरायल के साथ अपने संबंध समाप्त कर ले तथा फिलिस्तीनियों को क्षतिपूर्ति का भुगतान करे। माइक्रोसाफ्ट इजरायल को नरसंहार करने के लिए आवश्यक उपकरण उपलब्ध करा रहा है, जबकि वह अपने कर्मचारियों को इस वास्तविकता के बारे में गुमराह कर रहा है।
    
इस माह प्रकाशित एक संयुक्त मीडिया जांच में पाया गया कि एक इजरायली सैन्य निगरानी एजेंसी, इजरायल के कब्जे वाले पश्चिमी तट और गाजा में रहने वाले फिलिस्तीनियों द्वारा किए गए मोबाइल फोन काल की बड़ी मात्रा में रिकार्डिंग को संग्रहित करने के लिए माइक्रोसाफ्ट के एज़्योर साफ्टवेयर का उपयोग कर रही थी।
    
अप्रैल में, माइक्रोसाफ्ट एआई के सीईओ मुस्तफा सुलेमान के भाषण को एक कर्मचारी ने बीच में ही रोक दिया, जिसने प्रौद्योगिकी कंपनी की 50वीं वर्षगांठ के जश्न के दौरान कंपनी के इजराइल के साथ संबंधों का विरोध किया था। बाद में उस कर्मचारी और एक अन्य विरोध प्रदर्शनकारी कर्मचारी को भी नौकरी से निकाल दिया गया।
    
इजरायल के साथ संबंधों को लेकर कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों को विरोध का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि इजरायल के सैन्य हमले से गाजा में मानवीय संकट बढ़ गया है तथा बच्चों सहित भूख से मर रहे फिलिस्तीनियों की तस्वीरों ने वैश्विक आक्रोश पैदा कर दिया है।
 

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