राजनीति

‘जी-राम-जी’ : मुंह में राम बगल में छुरी

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मोदी सरकार ने आखिर में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम) का ‘राम नाम सत्य’ कर दिया। मनरेगा की जगह ‘वी बी-जी-राम-जी’ (विकसित V भारत B गारण्टी

हवाई परिवहन की बदहाली

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पिछले दिनों इंडिगो कम्पनी की उड़ानों के रद्द होने ने हवाई अड्डों पर जो दृश्य दिखाये उसने विकास करते भारत की पोल खोल दी। चंद दिनों में भारत की इस सबसे बड़ी विमानन कम्पनी की

इंटरव्यू : आधा-अधूरा लोकतंत्र नहीं चाहिए -सज्जाद हुसैन कारगिली

24 सितंबर को लद्दाख में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक पूर्व सैनिक भी शामिल था। प्रदर्शनकारियों ने भाजपा कार्यालय में आग

लद्दाख : न्यायपूर्ण संघर्ष को कुचलती मोदी सरकार

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बीते दिनों लद्दाख की जनता एक बार फिर से अपनी न्यायपूर्ण मांगों को लेकर सड़कों पर उतरी। पर जनता की हर न्यायपूर्ण मांग के लिए कानों में तेल डाले बैठी गूंगी हो चुकी मोदी सरका

उप राष्ट्रपति का चुनाव

उपराष्ट्रपति का चुनाव सम्पन्न हो गया। सी पी राधाकृष्णन भारत के नये उपराष्ट्रपति बन गये। 
    

‘‘माननीय’’ पूर्व सांसद को उम्र कैद

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यौन उत्पीड़न के बहुचर्चित मामले में प्रज्वल रेवन्ना को 1 अगस्त को विशेष अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई है। कुछ समय पहले तक ‘‘माननीय’’ रहे अब कैदी संख्या में बदल गये हैं। ज

अमेरिकी तटकर और भारत का शासक वर्ग

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ट्रम्प द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत तटकर थोपने के बाद से भारत सरकार सकते में है। मोदी के प्रिय मित्र ट्रम्प द्वारा किये गये इस व्यवहार से बड़बोले मोदी-शाह को सांप सूंघ गया है

धराली आपदा : पूंजीवादी विकास का भयानक मंजर

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उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली, हर्षिल और सूक्खी गांव भयानक आपदा के शिकार बने हैं। 4 अगस्त की दोपहर को पहाड़ से तेज बहाव के साथ मलवा-गाद ने गांव के एक हिस्से को पूरी

गुजरात माडल : ‘टोटल सियाप्पा’

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9 जुलाई को आंणद को बड़ोदरा से जोड़ने वाला पुल जो कि महिसागर नदी के ऊपर बना  हुआ था, ठीक बीच से टूट गया। पुल के टूटने से पुल पर चल रहे वाहन नदी में गिर गये और 20 से अधिक लोग

आलेख

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अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

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अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

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पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

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जैसा कि इंटरव्यू के शीर्षक से स्पष्ट है कि पिकेटी एक ऐसी दुनिया का ख्वाब परोसते हैं जिसमें बगैर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाये ज्यादातर लोग खुशहाल बन सकते हैं। इस सुन्दर दुनिया को हासिल करने के लिए वे किसी वर्ग संघर्ष बढ़ाने या क्रांति की वकालत नहीं करते। बल्कि वे कुछ नुस्खे सुझाते हैं जिस पर चल कर मौजूदा पूंजीवादी-साम्राज्यवादी दुनिया को ही खुशनुमा बनाया जा सकता है। 

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अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।