राजनीति

खेल और खेला

/khel-and-khelaa

पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बताया गया कि पश्चिम बंगाल में भारत के राष्ट्रपति का अपमान किया गया। उन्होंने तल्ख शब्दों में राष्ट्रपति के कथित अपमान की निन्दा की। प

रंग में भंग

/rang-mein-bhang

पिछले दिनों नई दिल्ली में ‘इण्डिया ए आई इम्पैक्ट समिट’ का आयोजन पूरी रंगबाजी में हुआ। यह समिट अपने पहले दिन से ही अपनी खास शैली में प्रधानमंत्री मोदी के आत्म प्रचार, चोरी

पैक्स अमेरिकाना और पैक्स सिलिका

/pax-amerikana-and-pax-silica

शीत युद्ध के जमाने में पैक्स अमेरिकाना शब्द खूब चलन में था। इसका आशय था दुनिया भर में अमरीकी प्रभुत्व। इसके लिए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने तमाम गठबंधन बना रखे थे- नाटो, स

झूठा कौन?

/liar-kaun

अक्सर ही भारत की राजनीति में नकली, बनावटी मुद्दे छाये रहते हैं। ये मुद्दे कभी सत्ता पक्ष से तो कभी विपक्ष की ओर से उछाले जाते हैं। इन मुद्दों को ऐसे पेश किया जाता है मानो

भाजपा के नवीन अध्यक्ष

/bhajapa-ke-navin-president

आखिर भाजपा को उसका नया अथवा नवीन अध्यक्ष मिल गया। संयोग से उसका नाम भी नबीन है। अब नबीन का बिहार में क्या मतलब होता है पता नहीं पर वह भाजपा का नवीन अध्यक्ष होगा यह तय है।

अजब-गजब तमाशा

/ajab-gajab-tamaasha-0

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे निकट आते जा रहे हैं वैसे-वैसे मोदी-शाह की चुनाव मशीनरी पूरी तरह से सक्रिय हो गयी है।

‘जी-राम-जी’ : मुंह में राम बगल में छुरी

/G-RAM-G-munh-mein-ram-bagal-mein-chhuri

मोदी सरकार ने आखिर में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी अधिनियम) का ‘राम नाम सत्य’ कर दिया। मनरेगा की जगह ‘वी बी-जी-राम-जी’ (विकसित V भारत B गारण्टी

हवाई परिवहन की बदहाली

/air-traffic-ki-badahaali

पिछले दिनों इंडिगो कम्पनी की उड़ानों के रद्द होने ने हवाई अड्डों पर जो दृश्य दिखाये उसने विकास करते भारत की पोल खोल दी। चंद दिनों में भारत की इस सबसे बड़ी विमानन कम्पनी की

इंटरव्यू : आधा-अधूरा लोकतंत्र नहीं चाहिए -सज्जाद हुसैन कारगिली

24 सितंबर को लद्दाख में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक पूर्व सैनिक भी शामिल था। प्रदर्शनकारियों ने भाजपा कार्यालय में आग

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।