राजनीति

लद्दाख : न्यायपूर्ण संघर्ष को कुचलती मोदी सरकार

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बीते दिनों लद्दाख की जनता एक बार फिर से अपनी न्यायपूर्ण मांगों को लेकर सड़कों पर उतरी। पर जनता की हर न्यायपूर्ण मांग के लिए कानों में तेल डाले बैठी गूंगी हो चुकी मोदी सरका

उप राष्ट्रपति का चुनाव

उपराष्ट्रपति का चुनाव सम्पन्न हो गया। सी पी राधाकृष्णन भारत के नये उपराष्ट्रपति बन गये। 
    

‘‘माननीय’’ पूर्व सांसद को उम्र कैद

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यौन उत्पीड़न के बहुचर्चित मामले में प्रज्वल रेवन्ना को 1 अगस्त को विशेष अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई है। कुछ समय पहले तक ‘‘माननीय’’ रहे अब कैदी संख्या में बदल गये हैं। ज

अमेरिकी तटकर और भारत का शासक वर्ग

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ट्रम्प द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत तटकर थोपने के बाद से भारत सरकार सकते में है। मोदी के प्रिय मित्र ट्रम्प द्वारा किये गये इस व्यवहार से बड़बोले मोदी-शाह को सांप सूंघ गया है

धराली आपदा : पूंजीवादी विकास का भयानक मंजर

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उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली, हर्षिल और सूक्खी गांव भयानक आपदा के शिकार बने हैं। 4 अगस्त की दोपहर को पहाड़ से तेज बहाव के साथ मलवा-गाद ने गांव के एक हिस्से को पूरी

गुजरात माडल : ‘टोटल सियाप्पा’

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9 जुलाई को आंणद को बड़ोदरा से जोड़ने वाला पुल जो कि महिसागर नदी के ऊपर बना  हुआ था, ठीक बीच से टूट गया। पुल के टूटने से पुल पर चल रहे वाहन नदी में गिर गये और 20 से अधिक लोग

सोनम के बहाने पुरुष प्रधानता का विलाप

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अपनी शादी के चंद रोज बाद ही अपने पति राजा रघुवंशी ही हत्या कराने की आरोपी सोनम रघुवंशी आजकल समाचार चैनलों व सोशल मीडिया की चहेती खबर बनी हुयी है। सभी समाचार प्रसारणकर्ता

मुंह मियां मिट्ठू के ग्यारह साल

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सोमवार 9 जून को देश भर के अखबारों में मोदी सरकार ने ‘विकसित भारत का अमृत काल : सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण के 11 साल’ शीर्षक से विज्ञापन छपवाया। उस विज्ञापन में 15 उपलब्धिय

भारत की विदेश नीति का दिवालियापन

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भारत आबादी के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा देश है और उसकी अर्थव्यवस्था भी खासी बड़ी है। इसीलिए दुनिया के सारे छोटे-बड़े देश उसके साथ कोई न कोई संबंध रखना चाहेंगे। इसमें कोई गर्व की बात नहीं है। गर्व की बात तब होती जब उसकी कोई स्वतंत्र आवाज होती और दुनिया के समीकरणों को किसी हद तक प्रभावित कर रहा होता। सच्चाई यही है कि दुनिया भर में आज भारत की वह भी हैसियत नहीं है जो कभी गुट निरपेक्ष आंदोलन के जमाने में हुआ करती थी। 

आलेख

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अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

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गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।