यूक्रेन-रूस युद्ध पर ट्रम्प का पलटना

/yukrain-russia-war-par-trump-ka-palatanaa

अमेरिकी चुनाव में रूस-यूक्रेन युद्ध बेहद कम समय में रुकवाने का वादा करने वाले ट्रम्प अब अपने वायदे से पलटी मारते नजर आ रहे हैं। चुनाव के वक्त ट्रम्प ने पुतिन की तारीफ करते हुए युद्ध के लिए बाइडेन को जिम्मेदार ठहराया था। बाद में जेलेंस्की की बेइज्जती से भी यह लग रहा था कि वो यूक्रेन पर दबाव डलवा शांति कायम करवा देंगे। पर यूरोपीय संघ के प्रमुख देशों की शह पर यूक्रेन शांति को तैयार नहीं हुआ और दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर हमले बोलते रहे। अब अंततः ट्रम्प को भी पुतिन के प्रति अपनी भाषा बदलनी पड़ी और वे यूक्रेन को नये सिरे से हथियारों की खेप देने की घोषणा करने लगे। 
    
ट्रम्प ने हाल में ही यूक्रेन को पैट्रीयाट मिसाइलें जो मूलतः प्रतिरक्षा का काम करती हैं देने की घोषणा की। हालांकि ट्रम्प ने बताया कि इन मिसाइलों व अन्य हथियारों की कीमत यूरोप के देश खासकर जर्मनी अमेरिका को अदा करेगा। जर्मनी के चांसलर ने अमेरिका से इन मिसाइलों को यूक्रेन को देने की अपील की थी। 
    
स्पष्ट है कि रूस-यूक्रेन युद्ध अमेरिका द्वारा प्रदत्त इन हथियारों से फिर से तेज होने की ओर बढ़ेगा। अभी युद्ध एक-दूसरे के क्षेत्रों में मिसाइलों से हमले के साथ द्रोण हमलों के रूप में जारी है। रूसी साम्राज्यवादी यूक्रेन के काफी इलाके (लगभग पांचवां हिस्सा) को कब्जा चुके हैं। 
    
रूसी साम्राज्यवादी शांति वार्ता के वक्त मौजूदा सीमा को अंतर्राष्ट्रीय सीमा मानने व यूक्रेन के सेना को एक स्तर पर रखने व नाटो में न शामिल होने पर शांति को तैयार थे पर यूरोपीय संघ के जर्मनी-फ्रांस के उकसावे पर जेलेंस्की इसके लिए तैयार नहीं हुए और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के साथ जंग जारी रही। 
    
दरअसल यूरोपीय साम्राज्यवादी किसी भी कीमत पर रूसी साम्राज्यवादियों की किसी किस्म की जीत को अपने लिए बड़े खतरे के बतौर देखते रहे हैं। जबकि चुनाव के बाद ट्रम्प चीन पर अपना ध्यान केन्द्रित करने की नीति पर चल रहे थे व इसके लिए रूसी साम्राज्यवादियों से सौदेबाजी को तैयार थे। पर यूरोपीय संघ के इस मसले पर तैयार न होने के चलते ट्रम्प को फिर से बाइडेन की नीति पर वापस आना पड़ा और वे यूक्रेन को हथियारों की सप्लाई के लिए तैयार हो गये। 
    
ट्रम्प ने अभी भी चीनी साम्राज्यवादियों को अपने पहले नम्बर पर निशाने पर रखा हुआ है। साथ ही वे पूरी दुनिया में तटकर युद्ध चला कभी एक घोषणा कर और अगले दिन उससे पलट कर एक वैश्विक अस्थिरता को पैदा करने के साथ अमेरिकी वर्चस्व का प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल में उन्होंने ब्रिक्स देशों व यूरोप पर नये तटकरों की घोषणा की है। यद्यपि चीन से तटकर युद्ध में दुर्लभ मृदा धातुओं पर चीन के कब्जे के चलते अपने कदम ट्रम्प को कुछ पीछे खींचने पड़े। 
    
चीनी साम्राज्यवादियों के उभार के सामने अमेरिका की गिरती हैसियत को बचाने के लिए ट्रम्प बीते कुछ माह से अपनी चालें चल रहे हैं। ये चालें वैश्विक व्यापार के साथ देशों की विकास दर तक को प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में ट्रम्प के ये मनमाने कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था को फिर रसातल में ले जाने का जरिया भी बन सकते हैं। 

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।