विविध

पतित पूंजीवाद के दौर में शासक वर्ग और जनता

/patit-punjivad-ke-daur-mein-shasak-varg-aur-janata

मजदूर-मेहनतकश जनता की दुनिया भर में हो रही लूट के बंटवारे को लेकर शासकों में टकराव है जो भांति-भांति से प्रकट हो रहा है। यूक्रेन पर रूसी हमला तथा ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमला इसी का परिणाम है। पर स्वयं लूट के मामले में दुनिया भर के पूंजीवादी शासकों की एकता है। लूट के मामले में देशी-विदेशी पूंजी की एकता है जबकि लूूट के बंटवारे को लेकर इनके बीच टकराव है।

होरमुज जलडमरूमध्य - ईरान के हाथ में एक सशक्त हथियार

/hormuz-jaladamarumadhya-iran-ke-hath-mein-ek-sashakt-hathiyar

एक बात निश्चित है कि इस युद्ध के दौरान ईरान पश्चिम एशिया में एक मजबूत बड़ी शक्ति के बतौर उभरा है। इसके हाथ में होरमुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण आना एक बड़ा हथियार है। उसने इस हथियार का बखूबी इस्तेमाल किया है। इसने अमरीकी साम्राज्यवादियों की दादागिरी को चुनौती दी है। और इस चुनौती में होरमुज के हथियारीकरण की अहम भूमिका है। यह आणविक बम से भी अधिक कारगर भूमिका निभा रहा है। 

महिला हितैषी या पाखण्डी

/mahila-hitaishi-ya-pakhandi

पिछले दिनों भारत की संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष में महिला हितैषी होने की प्रतियोगिता चली। मौका था महिला आरक्षण बिल व परिसीमन पर चर्चा का। एक चतुर चुनावबाज पर महिलाओं को

सिगनेचर ग्लोबल में मजदूरों की मौत

/signature-global-mein-workers-ki-death

चमचमाती दुनिया के पीछे और भी दुनिया है। वह दुनिया मजदूरों-किसानों की बदहाली की है। यह एक उजड़ती हुयी दुनिया है। पूंजीपतियों के मुनाफे के चक्कर में आज मजदूर-किसान बुनियाद म

राजद्रोह, NSA कानून का दुरुपयोग और तमाशा देखती सुप्रीम कोर्ट

/rajdroh-nsa-law-ka-durupayog-aur-tamashaa-dekhati-supreme-court

अक्सर ही सरकारें अपने विरोधियों को ठिकाने लगाने के लिए और सरकार के खिलाफ हो रहे न्यायपूर्ण संघर्षों को दबाने के लिए दमनकारी कानूनों का इस्तेमाल करती हैं। इन काले कानूनों

विद्युत संविदा कर्मचारियों का सम्मेलन सम्पन्न

/electricity-sanvida-emplyoee-ka-confrence-sampanna

लखनऊ/ उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ का चतुर्थ द्विवार्षिक सम्मेलन 4-5 अप्रैल 2026 को गांधी भवन प्रेक्षागृह कैसर बाग लखनऊ में आयो

एस आई आर के विरोध में सेमिनार

/s-i-r-ke-virodha-mein-seminaar

क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन द्वारा जलियांवाला बाग हत्याकांड को याद करते हुए 12 अप्रैल को हल्द्वानी, मऊ, हरिद्वार, बरेली में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सेमिनार आयोजित क

आलेख

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

/election-aayog-hindu-fascist-and-loktantra

एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।