दुनिया में भयावह होती स्थिति

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इजरायल द्वारा गाजा में 18 महीनों से जारी युद्ध में अभी तक 54,000 लोग मारे जा चुके हैं जिसमें अधिकांश संख्या में महिलाएं व बच्चे हैं। अब इजरायली शासक गाजा को मिटा डालने पर उतारू हैं। इजरायल ने गाजा पर अपना हमला तेज कर दिया है जिसमें उसने एक तरफ गोलाबारी तेज कर दी है वहीं दूसरी तरफ उसने गाजा की चारों तरफ से घेराबंदी कर दी है और वहां खाद्य पदार्थों और ईंधन की आपूर्ति पर रोक लगा दी है। नतीजा वहां पिछले कई हफ्तों से खाद्य पदार्थों की आपूर्ति नहीं हो पाई है। 
    
संयुक्त राष्ट्र संघ के संस्थानों के मुताबिक गाजा पट्टी में अकाल सी स्थिति पैदा हो रही है। एक अधिकारी ने तो यहां तक कहा है कि अगले 48 घंटे (20 मई को) में वहां 14,000 बच्चे भूख से जान गंवा सकते हैं जिसमें नवजातों की संख्या काफी अधिक होगी। खाद्य पदार्थों की आपूर्ति पर रोक लगाने के कारण महिलाएं जो अपने बच्चों को दूध पिलाती हैं, वह अपने बच्चों को दूध तक नहीं पिला पा रही हैं क्योंकि खाना ना खाने के कारण उनके शरीर में दूध नहीं बन रहा है जिसे वह बच्चों को पिला सके। यह बहुत ही भयावाह स्थित है कि दूधमुंहे बच्चों तक को नहीं बख्शा जा रहा है।
    
वहीं दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी की गई ‘‘वैश्विक खाद्य संकट रिपोर्ट 2025’’ सामने आई है जिसमें कहा गया है कि वर्ष 2024 में दुनिया भर में 23 देशों के करीब 30 करोड़ लोग गंभीर भूख से जूझ रहे हैं। यह संख्या 2023 की तुलना में 1.37 करोड़ अधिक है और यह लगातार छठा वर्ष है जब स्थिति और खराब हुई है।
    
दुनिया में एक समय अकाल पड़ते थे और लोग भूख से मर जाते थे। उस समय अनाज की पैदावार ही इतनी नहीं थी कि सबको खिलाया जा सकता। पर आज खाद्य पदार्थों के अंबार लगे हुए हैं। अनाजों के गोदाम के गोदाम भरे पड़े हैं पर फिर भी लोग भूख से मर रहे हैं। पूरी दुनिया के स्तर पर ही यह एक भयावह स्थिति है। 
    
ऐसी ही बुरी व भयावह स्थिति को देखते हुए गोरख पांडेय ने कहा होगा कि :
ये आंखें हैं तुम्हारी या
तकलीफ़ का उमड़ता हुआ समुन्दर
इस दुनिया को
जितनी जल्दी हो बदल देना चाहिये। 
            -हरीश, गुड़गांव

आलेख

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