एक राष्ट्र का सरेआम बलात्कार

Published
Fri, 01/16/2026 - 07:10
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नये साल का आगाज एक राष्ट्र के साथ बलात्कार के साथ हुआ। बलात्कारी थे : अमरीकी साम्राज्यवादी और जिस राष्ट्र का बलात्कार हुआ, उस राष्ट्र का नाम है : वेनेजुएला। यह बलात्कार सरेआम हुआ और बलात्कारी पूरी बेशर्मी से एक के बाद एक राष्ट्र (कोलम्बिया, क्यूबा, मैक्सिको आदि) को इसी तरह से बलात्कार करने की धमकी देने लगा। इस बलात्कारी की हवस बहुत बड़ी है। उसे अपनी हवस पूरी करने के लिए इस दुनिया के सारे राष्ट्र चाहिए। इतना ही नहीं उसे पूरी धरती चाहिए। और क्योंकि उसकी बढ़ती हवस के सामने समूची धरती भी कम पड़ जाती है इसलिए उसे पूरी कायनात चाहिए। चन्द्रमा चाहिए, मंगल ग्रह चाहिए, जो कुछ भी प्रकृति में है वह सब कुछ चाहिए। और इसके लिए वह किसी भी हद तक जाने को तैयार है। 
    
जब से स.रा.अमरीका एक साम्राज्यवादी देश बना है तब से उसका पूरा इतिहास एक से बढ़कर एक काले कारनामों से भरा रहा है। इन काले कारनामों को अमरीका के राष्ट्रपति एक से बढ़कर एक लफ्फाजी, झूठ, मक्कारी के साथ अंजाम देते रहे हैं। झूठ, मक्कारी और लफ्फाजी में डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने पूर्ववर्तियों को बहुत पीछे छोड़ दिया है।
    
बीसवीं सदी का पूरा इतिहास अमरीकी साम्राज्यवादियों की काली करतूतों से भरा हुआ है। और फिर इक्कीसवीं सदी के जितने साल बीते हैं उतनी ही इनकी काली करतूतों की गिनती भी है। इराक, अफगानिस्तान, लीबिया, सीरिया, सूडान, सोमालिया, यूक्रेन, ईरान, फिलिस्तीन.....और अब वेनेजुएला। अमेरिकी साम्राज्यवादी वेनेजुएला के बाद कई अन्य देशों पर ऐसी ही आतंकी कार्यवाही करना चाहते हैं। ट्रम्प अब बार-बार ईरान व ग्रीनलैण्ड का नाम ले रहे हैं। ईरान में आजकल जो कुछ हो रहा है उसमें अमेरिका का एक हाथ होने से कौन इंकार कर सकता है।
    
वेनेजुएला एक सम्प्रभु स्वतंत्र राष्ट्र है। ट्रम्प ने न केवल वेनेजुएला की स्वतंत्रता व सम्प्रभुता को अपने पैरों तले कुचल दिया बल्कि उसने बता दिया कि उसके लिए अंतर्राष्ट्रीय कानून, संस्थाओं, नियमों, मूल्यों, कूटनीति आदि का कोई मतलब नहीं है। इस तरह से वेनेजुएला पर किया गया हमला सिर्फ वेनेजुएला पर न होकर लातिन अमरीका सहित तीसरी दुनिया के हर एक देश पर हमला बन जाता है। इसी तरह यह, दूसरे विश्व युद्ध के बाद पूंजीवादी दुनिया में बने, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं, सहमतियों, समझौतों व अंतर्राष्ट्रीय कानून पर भी हमला बन जाता है। 
    
वेनेजुएला दक्षिण अमरीका महाद्वीप का एक ऐसा देश है जिसके पास खनिज तेल, प्राकृतिक गैस व महत्वपूर्ण व दुर्लभ खनिजों के विशाल भण्डार हैं। उसके पास अनुमानतः 303 अरब बैरल तेल का भण्डार है। इसे दुनिया का ज्ञात सबसे बड़ा तेल भण्डार माना जाता है। अमरीकी साम्राज्यवादी इसी तेल भण्डार को किसी भी तरीके से अपने कब्जे में लेने के मंसूबे बांधते रहे हैं। अमरीकी साम्राज्यवादियों के इन काले मंसूबों के खिलाफ वेनेजुएला की जनता बार-बार खड़ी होती रही है। पूरे लातिन अमरीका की तरह वेनेजुएला में अमरीकी साम्राज्यवाद के प्रति गहरी घृणा रही है। और इसका इतिहास भी कम से कम दो सदी पुराना है। वेनेजुएला लम्बे समय तक स.रा.अमरीका का नव उपनिवेश रहा था। 1976 में वेनेजुएला ने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण कर दिया था। ह्यूगो शावेज के कार्यकाल (1999-2013) में अमरीका की बहुराष्ट्रीय तेल कम्पनियों की भूमिका को अत्यन्त सीमित कर दिया था। उसके बाद एक-दो अमरीकी कम्पनियां वहां काम करती रही हैं। 
    
ह्यूगो शावेज और निकोलस मादुरो के शासन काल में वेनेजुएला अमरीकी साम्राज्यवादियों की आंखों में खटकता रहा है। शावेज और मादुरो ने अमरीकी साम्राज्यवादियों के स्थान पर रूसी, चीनी व यूरोपीय साम्राज्यवादियों से निकट व गहरे संबंध बनाये। अमरीकी साम्राज्यवादियों की कोशिश थी कि वह किसी भी तरह से शावेज को सत्ता से हटाये परन्तु वह इसमें कामयाबी नहीं पा सके। शावेज की मृत्यु के बाद उन्होंने सोचा था कि शायद मादुरो के कार्यकाल में वे वह सब हासिल कर सकेंगे जो वे शावेज के समय हासिल नहीं कर सके थे। मादुरो को भी जब अमेरिकी साम्राज्यवादी अपने कुटिल व षड्यंत्रकारी तरीकों से नहीं हटा सके तो 3 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति मादुरो व उनकी पत्नी को एक आक्रामक सैन्य कार्यवाही में जबरदस्ती अपहरण कर ये अमेरिका ले गये। वेनेजुएला पर अमरीकी साम्राज्यवादियों के इस आक्रमण के दौरान कई लोग मारे गये। अब ट्रम्प दावा कर रहा है कि वही वेनेजुएला के तेल भण्डार का मालिक है। वही वेनेजुएला को चलायेगा। ट्रम्प दम्भपूर्वक घोषित कर रहा है कि उसे किसी अंतर्राष्ट्रीय कानून की कोई जरूरत नहीं है। पहले के राष्ट्रपति जो काम बगैर कहे या फिर चोरी-छिपे करते थे वही काम अब ट्रम्प पूरी नंगई व गुण्डई से कर रहा है। 
    
वेनेजुएला की स्वतंत्रता व सम्प्रभुता पर अमरीकी साम्राज्यवादी आक्रमण की हर ओर से निंदा हुयी है। कुछ ही ऐसे शासक हैं जो मोदी की तरह मौन या तटस्थ हैं। और बहुत-बहुत थोड़े से हैं जो इजरायल के नेतन्याहू की तरह हैं जो निर्लज्जतापूर्वक ट्रम्प के साथ खड़े हैं। क्यांकि वे भी ट्रम्प की ही तरह नमूने हैं। खास बात यह है कि ट्रम्प का सबसे ज्यादा विरोध स्वयं स.रा.अमरीका में हुआ है। बड़े-बड़े विशाल जुलूस निकले हैं जिनमें वेनेजुएला पर अमरीकी हमले की निंदा की गयी है। मादुरो की तुरंत रिहाई और अमरीका को वेनेजुएला से छूट रहने की मांग की गयी है। वेनेजुएला में भी बड़े प्रदर्शन हुए हैं। यूरोप, एशिया, आस्ट्रेलिया, अफ्रीका के कई हिस्सों में भी अमरीकी साम्राज्यवाद के इस नग्न हमले का विरोध किया गया है। 
    
वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्ररोज दो तरफा चालें चल रही हैं। वे एक ओर अपनी जनता के आक्रोश को शांत करने के लिए उग्र बयान दे रही हैं और दूसरी ओर अमरीकी साम्राज्यवादियों से खुले-छिपे ढंग से सुलह समझौते कर रही हैं। वे अमरीकी साम्राज्यवादियों की अनेकों मांगें स्वीकार कर चुकी है। विपक्षी, राजनैतिक नेताओं से लेकर एन.जी.ओ. के कर्ताधर्ताओं को जेल से रिहा कर चुकी हैं। वेनेजुएला की जिस नेता मारिया कोरीना मचाडो को शांति का नोबेल पुरुस्कार मिला था को ट्रम्प ने पहले एक प्यादे के रूप में इस्तेमाल किया, अब उसे वह इस लायक नहीं मानता कि वेनेजुएला में एक कठपुतली के रूप में भी इस्तेमाल कर सके। मचाडो का राष्ट्रपति बनने का सपना अमरीका के बगैर पूरा नहीं हो सकता। 
    
वेनेजुएला के समाज में व्यापक रूप से वर्गीय व सामाजिक अंतरविरोध व तनाव है। ह्यूगो शावेज, निकोलस मादुरो या रोड्रिगेज शासक वर्ग के उस हिस्से का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं जो वेनेजुएला को मूलतः अमरीकी साम्राज्यवाद की छाया से मुक्त कराकर अपने देश की तेल सम्पदा के दम पर अपने हितों को साधना चाहते थे। यह हिस्सा अपना जनाधार बनाये रखने के लिए कुछ लोकप्रिय (पापुलर) कल्याणकारी कदम उठाने के साथ अमरीकी साम्राज्यवाद का विरोध करता था। जबकि शासक वर्ग का दूसरा धड़ा घोर दक्षिणपंथी व अमरीकी साम्राज्यवाद परस्त रहा है। शावेज व मादुरो के समय में इस धड़े की राजनीति व सामाजिक साख कमजोर रही है। अमरीका जब षड्यंत्रकारी ढंग से अपने चहेतों को सत्ता में बिठा नहीं पाया तो उसने सीधे वेनेजुएला के राष्ट्रपति का सैन्य अपहरण कर, वेनेजुएला की स्वतंत्रता व सम्प्रभुता का बलात्कार कर वह हासिल करने की कोशिश की है जो हासिल करना चाहता था। 
    
वेनेजुएला की मजदूर-मेहनतकश जनता एक ओर साम्राज्यवाद और दूसरी ओर देशी पूंजीवाद की चक्की में पिस रही है। अकूत तेल व खनिज सम्पदा के भण्डार के बावजूद उसका जीवन गरीबी, बेरोजगारी, अभाव व महंगाई के बीच बीत रहा है। अमरीका के उसके भण्डारों पर कब्जा करने के बाद उसका जीवन और नारकीय होता जायेगा। उसके सामने इसके सिवा क्या रास्ता है कि वह मजदूरों-मेहनतकशों की ऐसी क्रांति की तैयारी करे जो वेनेजुएला से साम्राज्यवाद और पूंजीवाद दोनों को जड़ से उखाड़ कर फेंक दे। ऐसा करने की स्थिति में ही वे सच्चे अर्थों मे वेनेजुएला की स्वतंत्रता व सम्प्रभुता को हासिल कर सकेंगे। 
    
बीसवीं सदी का इतिहास अमरीकी साम्राज्यवाद के हमले, कब्जे का इतिहास है तो उसके बार-बार मुंह की खाने का भी इतिहास है। वियतनाम ने दिखला दिया था कि कैसे किसी देश के मजदूर, किसान व अन्य मेहनतकश अपने राष्ट्र की रक्षा करते हैं। अब समय आ गया है कि वेनेजुएला की मजदूर-मेहनतकश जनता ही नहीं पूरी दुनिया की जनता भी ऐसा ही करे। 

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