मजदूर नेताओं पर फर्जी मुकदमों के खिलाफ संघर्ष

/majdoor-netaon-par-farji-mukadamon-ke-khilaaf-struggle

हरिद्वार/ 20 मई 2025 को हरिद्वार (उत्तराखंड) पुलिस प्रशासन और एंकर पैनासोनिक प्रबंधन द्वारा 11 मजदूर नेताओं पर लगाए गए फर्जी मुकदमों के विरोध में इंकलाबी मजदूर केंद्र, संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा तथा अन्य सामाजिक संगठनों द्वारा जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया गया और मजदूर विरोधी लेबर कोड्स को रद्द करने के विरोध में राष्ट्रपति महोदय को ज्ञापन भेजा गया। 
    
हरिद्वार सिडकुल के पुलिस प्रशासन और एंकर पैनासोनिक प्रबंधन द्वारा मजदूर नेताओं पर लगाये गये फर्जी मुकदमों के विरोध में 20 मई को जिला कलेक्ट्रेट परिसर पर 12 बजे से 3.30 बजे तक विरोध सभा कर प्रदर्शन किया गया। साथ ही मजदूर विरोधी लेबर कोड्स को रद्द करने व सार्वजनिक सम्पत्तियों का निजीकरण रोकने व ठेका प्रथा समाप्त करने तथा ट्रेड यूनियन आंदोलन के दमन के विरोध में राष्ट्रपति महोदया को एक ज्ञापन भी प्रेषित किया गया। 
    
इंकलाबी मजदूर केंद्र के हरिद्वार प्रभारी पंकज कुमार ने विरोध प्रदर्शन में अपनी बात रखते हुए कहा कि एंकर पैनासोनिक के प्रबंधन वर्ग और पुलिस प्रशासन को 15 दिन का समय दिया गया था कि इंकलाबी मजदूर केंद्र के पंकज कुमार, जय प्रकाश, संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा के संयोजक व फूड्स श्रमिक यूनियन आईटीसी के महामंत्री गोविंद सिंह व अध्यक्ष ब्रिजेश कुमार, कर्मचारी संघ सत्यम आटो के महिपाल सिंह, किर्बी श्रमिक कमेटी के संदीप कुमार, अभिषेक पाल, सूरज अवस्थी, सुनील कुमार, अरुण तथा क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के संयोजक नासिर अहमद समेत 100 मजदूरों पर फर्जी मुकदमे वापस नहीं होते हैं तो पूरे सिडकुल में आंदोलन की रणनीति बनायी जायेगी। 4 मई को एंकर पैनासोनिक के प्रबंधन और पुलिस प्रशासन का पुतला फूंक कर मजदूरों के ऊपर लगाये गये फर्जी मुकदमे वापस लेने की मांग की गई थी। 
    
ज्ञात हो कि एंकर पैनासोनिक प्रबंधन द्वारा महिला मजदूरों के शोषण के साथ मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा था। 20 सालों से काम करने के बाद भी 18 से 20 हजार रुपए ही दिये जाते हैं। 8-10 सालों से ठेका मजदूरों को स्थाई करना तो दूर बल्कि 11,000 रुपए में निचोड़ा जा रहा था। ये वे हालात थे जिस वजह से 4000 से अधिक महिला मजदूरों को लाचार होकर सड़क पर उतरना पड़ा। ऐसी स्थिति में इंकलाबी मजदूर केंद्र, संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा और अन्य सामाजिक संगठन एंकर के मजदूरों के साथ खड़े हुए थे। और इसका इनाम पुलिस द्वारा मजदूर नेताओं पर फर्जी मुकदमे लगाकर दिया गया।
    
पुलिस प्रशासन सिडकुल के पूंजीपतियों व उनके प्रबंधन के खिलाफ कोई शिकायत नहीं सुनते हैं न कोई एफआईआर दर्ज करते हैं परन्तु पूंजीपतियों की शिकायत पर कार्यवाही में एक मिनट भी नहीं लगाते हैं। यह पुलिस प्रशासन की पूंजीपतियों के प्रति अपनी ‘‘मित्रता’’ को दिखाता है।
    
विरोध प्रदर्शन व सभा में इंकलाबी मजदूर केंद्र, संयुक्त संघर्षशील ट्रेड यूनियन मोर्चा से जुड़ी यूनियन भेल मजदूर ट्रेड यूनियन, फूड्स श्रमिक यूनियन आईटीसी, देव भूमि श्रमिक संगठन हिन्दुस्तान यूनिलीवर, एवरेडी मजदूर यूनियन, कर्मचारी संघ सत्यम आटो, किर्बी श्रमिक कमेटी, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, प्रगतिशील भोजनमाता संगठन के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता रूप चंद आजाद व दर्जनों मजदूर शामिल रहे। 
           -हरिद्वार संवाददाता
 

आलेख

/sadho-thagawa-nagariya-lootal-ho

वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?

/west-asia-ke-sankat-ka-vaishawik-prabhaav

अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं। 

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।