जैसी करनी वैसी भरनी

7 अक्टूबर शनिवार के दिन हमास ने इजरायल पर जो जोरदार हमला बोला वह इजरायल के क्रूर जियनवादी शासकों को हतप्रभ करने वाला रहा। इजरायल के धूर्त, क्रूर और भ्रष्ट प्रधानमंत्री नेतन्याहू को घण्टों तक तो यह ही नहीं सूझा कि वह करें तो क्या करें। कैसे अपनी फजीहत का सामना करें। आखिर में उसने वही किया जो वह और उसके पहले के शासक करते आ रहे हैं। फिलिस्तीनियों का और क्रूर दमन। गाजा पट्टी की पूर्ण रूप से नाकाबंदी कर; बिजली-पानी काटकर; राशन-दवाओं व जरूरी सामानों की सप्लाई को रोक कर भारी बमबारी की गयी। गाजा पट्टी को बमों से पाट दिया गया और वेस्ट बैंक में कई फिलिस्तीनियों की हत्या कर दी गई। 
    
इजरायल के क्रूर जियनवादी शासकों ने कभी नहीं सोचा था कि कोई उनके देश में घुसकर भयानक तबाही का मंजर खड़ा कर सकता है। अभी तक वे खुद यही फिलिस्तीन, लेबनान और सीरिया में करते रहे थे। पहली दफा ऐसा हुआ कि इजरायल के शासकों द्वारा बरपाये जाने वाले आतंक का जवाब उन्हें उनकी ही भाषा में मिला है। आतंक बरपाने वाले खुद आतंकित हो गये।
    
हमास ने इजरायल पर हमले की तैयारी बहुत ही गोपनीय ढंग से की। इजरायल की बहुप्रचारित और अमेरिकी व पश्चिमी साम्राज्यवादियों द्वारा समर्थित गुप्तचर संस्था ‘मोसाद’ को इस हमले की तैयारी और हमले की कोई जानकारी तक नहीं मिली। इजरायल की सरकार, सेना और गुप्तचर संस्था के मुंह पर हमास ने जोरदार तमाचा मारा। 
    
हमास ने अपनी सत्ता की ताकत के अहंकार में डूबे इजरायल के क्रूर जियनवादी शासकों को ही नहीं हतप्रभ किया बल्कि उसके दुनिया भर में फैले यारों को भी चौंका दिया। जो बाइडेन, ऋषि सुनक, नरेन्द्र मोदी जैसों को ऐसा लगा मानो हमास ने इजरायल पर नहीं स्वयं इनकी सत्ता को भी चुनौती दे दी है। 
    
हमास ने इजरायल पर नभ-जल-थल तीनों ही ओर से हमला किया। और इस हमले को इजरायल के प्रधानमंत्री ने किसी आतंकी हमले के बजाय युद्ध की संज्ञा दी। और घोषित किया कि इजरायल युद्ध के बीच है। और इजरायल के शासकों ने इस मौके पर वे ही सब कदम उठाये जो कोई शासक युद्ध के समय उठाता है। आपातकाल लागू करना और रिजर्व सेना को युद्ध में उतारना। उन सब लोगों को मोर्चे पर बुला लिया गया जिन्होंने किसी समय अनिवार्य सैन्य सेवा के रूप में सैन्य प्रशिक्षण लिया था व जिन्होंने सेना में नौकरी की थी। इस मामले में इजरायली शासक ठीक हैं कि यह एक युद्ध ही है न कि कोई छोटा-बड़ा आतंकी हमला। 
    
इस युद्ध में सैकड़ों की संख्या में इजरायली सैनिक व निर्दोष नागरिक मारे गये हैं। और ठीक इसी तरह इजरायली सेना की कार्यवाही में हमास के लड़ाकों के साथ कई गुना अधिक संख्या में आम निर्दोष फिलिस्तीनियों की हत्यायें की गई हैं। चोट खाये इजरायली शासक क्रूरता की किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। वे कलस्टर बमों से लेकर ऐसे बमों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो अमेरिकी साम्राज्यवादी अफगानिस्तान में पहाड़ी चट्टानों में गुफाओं में छिपे तालिबानी लड़ाकों के लिए करते थे। गाजा पट्टी में रिहायशी इमारतें, अस्पताल सभी कुछ तबाह कर दिये गये हैं। 
    
हमास ने इस लड़ाई में इजरायली शासकों व आम जनता को आतंकित करने के लिए उनके ही तरीकों को उन पर ही आजमा दिया- निहत्थे लोगों की हत्या करना; निर्दोषों को सिर्फ इसलिए मार देना कि वे शत्रु देश के नागरिक हैं। हमास न केवल इजरायल की पैदाइश है बल्कि वह उन्हीं अतिवादियों का शिकार है जिसके शिकार क्रूर इजरायली शासक हमेशा से रहे हैं। इजरायली शासक किसी भी कीमत पर फिलिस्तीनी राष्ट्र के पक्ष में नहीं हैं। उनकी मंशा इजरायल के गठन के दिन से रही है कि वे सम्पूर्ण फिलिस्तीन पर ही नहीं बल्कि लेबनान, सीरिया, मिस्र के इलाकों पर कब्जा कर ग्रेटर इजरायल का निर्माण करें। ठीक इसी तरह हमास भी किसी भी कीमत पर इजरायली राष्ट्र को मान्यता देने को तैयार नहीं है। 
    
इजरायली हठधर्मिता के पीछे उनकी अपनी सैन्य-आर्थिक ताकत के साथ अमेरिकी साम्राज्यवादियों का साथ रहा है। द्विराष्ट्र : इजरायल व स्वतंत्र फिलिस्तीन राष्ट्र ही समस्या का वास्तविक समाधान है। 1948 का संयुक्त राष्ट्र संघ का प्रस्ताव ही आज भी इस समस्या के हल की राह खोल सकता है। इसका अर्थ होगा इजरायल को 1948 की सीमाओं पर लौटना होगा और फिलिस्तीन की जमीन को खाली करना होगा। 
    
फिलवक्त तो यह युद्ध भीषण से भीषण होता जा रहा है। हिजबुल्ला के युद्ध में प्रवेश करने के बाद यह युद्ध और नया मोड़ ले लेगा तथा और भयावह हो जायेगा। 

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