‘साहेब’ की विदेश यात्रा

Published
Thu, 07/16/2026 - 08:50
/saheb-ki-videsh-yatraa

प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दिनों इण्डोनेशिया, आस्ट्रेलिया व न्यूजीलैण्ड की यात्रा की। इन तीनों देशों की यात्रा में सैन्य सहयोग व महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रंखला विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। यह समूचा सहयोग चीन के खिलाफ अमेरिकी नेतृत्व में चल रहे घेराबंदी अभियान से निकटता से जुड़ा हुआ है। इस तरह प्रधानमंत्री मोदी इस यात्रा से अमेरिकी साम्राज्यवादियों को खुश करने की मंशा पाले हुए थे। 
    
भारत पहले से ही अमेरिका द्वारा चीन को घेरने के लिए बनाये गये क्वाड गठबंधन का हिस्सा है। भारत जहां एक ओर चीन को घेरने की अमेरिकी रणनीति का प्रमुख अंग है वहीं भारतीय शासक रूस से अपने परम्परागत दोस्ताना रिश्तों को तोड़ने को भी तैयार नहीं हैं। वे रूस से रिश्तों व रूस से सैन्य साजो सामान व तेल की खरीद पर जब तब अमरीकी झिड़की भी सहते रहे हैं। 
    
6 से 8 जुलाई की इण्डोनेशिया यात्रा के दौरान मोदी ने इण्डोनेशिया केे राष्ट्रपति प्रबासो सुबियातो से मुलाकात की। इण्डोनेशियाई संसद को सम्बोधित किया। और प्रवासी भारतीयों के स्वागत समारोह में शामिल हुए। इण्डोनेशिया भारत-रूस के संयुक्त उद्यम ब्रहमोस द्वारा निर्मित क्रूज मिसाइल प्रणाली खरीदने को उत्सुक है। लगभग 300 किमी मारक क्षमता की यह मिसाइल 200 किग्रा. विस्फोटक ले जा सकती है। इसके अतिरिक्त रक्षा क्षेत्र की एक निजी इण्डोनेशियाई कम्पनी व भारत की एक कम्पनी के बीच हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल की खरीद का समझौता हुआ। भारत और इण्डोनेशिया दोनों देश परस्पर रक्षा सहयोग बढ़ाकर मलक्का जलडमरूमध्य व्यापारिक रास्ते पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं जो चीन से किसी टकराव की स्थिति में बेहद महत्वपूर्ण रास्ता बन जायेगा। 
    
इसके साथ ही भारत ने इण्डोनेशिया में इस्पात, निकिल और दुर्लभ मृदा तत्व चुम्बक निर्माण में निवेश करने व इण्डोनेशिया में दुर्लभ मृदा तत्व प्रसंस्करण विकसित करने में सहयोग करने की सहमति दी। 
    
8 से 10 जुलाई की आस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान मोदी ने प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज के साथ तीसरा वार्षिक शिखर सम्मेलन किया। क्वाड के दोनों सदस्य देशों में सैन्य सहयोग बढ़ाने पर कई समझौते किये। आस्ट्रेलिया भारत को यूरेनियम बेचने पर सहमत हुआ। दोनों देशों के तटरक्षक दलों के बीच परस्पर सहयोग का समझौता हुआ। आस्ट्रेलिया ने हिंद महासागर के कोकोस द्वीप समूह में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में सहयोग का करार किया। 
    
भारत-आस्ट्रेलिया पहले से ही तीनों सेनाओं के संयुक्त युद्धाभ्यासों में जुटे हुए हैं। अब यह युद्धाभ्यास और बढ़ाये जायेंगे। 
    
10-11 जुलाई की न्यूजीलैण्ड यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच खुफिया समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया। न्यूजीलैण्ड पहले से ही अमेरिका, आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा के साथ शीर्ष स्तरीय ‘फाइव आइज’ खुफिया जानकारी साझा करने के नेटवर्क का हिस्सा है। वह एक इलेक्ट्रानिक जासूसी अड्डे का संचालन कर हिन्द महासागर की खुफिया जानकारी अमेरिका को देता है। इसके साथ ही भारत-न्यूजीलैण्ड मुक्त व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने पर भी बातचीज हुई। अभी इस समझौते को न्यूजीलैण्ड की संसद का अनुमोदन हासिल करना है। 
    
तीनों देशों में अप्रवासी भारतीयों के कार्यक्रम आयोजित कर संघ-भाजपा ने मोदी के नारे लगवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इस सबके बीच आस्ट्रेलिया-न्यूजीलैण्ड में मोदी विरोधी प्रदर्शनों की खबर मीडिया छुपा ले गया। साथ ही इन तीनों देशों की सरकारों ने भारत में मोदी काल में मुसलमानों पर बढ़ रहे हमलों को मुद्दा बनाना जरूरी नहीं समझा। अपनी आदत के अनुरूप मोदी ने यहां भी कोई प्रेस वार्ता करने की जरूरत नहीं समझी। 
    
कुल मिलाकर मोदी की ये तीन देशों की यात्रा भारतीय पूंजीपतियों के लिए मुनाफे के नये अवसर जुटाने, चीन के विरुद्ध सैन्य सहयोग बढ़ाने पर केन्द्रित रही। अब देखना यह है कि ट्रम्प इन यात्राओं के लिए मोदी की पीठ थपथपाते हैं या नहीं। 

आलेख

/sadho-thagawa-nagariya-lootal-ho

वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?

/west-asia-ke-sankat-ka-vaishawik-prabhaav

अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं। 

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

/emerjency-tab-aur-ab

पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।